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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
मिथिला नरेश के दरबार में गोनू झा के बुद्धिकौशल और वाक्चातुर्य का जो जादू चल रहा था उसकी कीर्ति मिथिलांचल के आस -पास के क्षेत्रों में भी फैल चुकी थी । मिथिला के पड़ोसी राज्य अंग देश के राजा ने राज्योत्सव के कई अवसरों पर गोनू झा को विशेष रूप से...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा अभी जगे ही थे कि चार नवयुवक उनके घर पहुँचे और गोनू झा के दरवाजे पर दस्तक दी । गोनू झा मन ही मन भुनभुनाये न जाने कौन आ गया , इतने सबेरे !...बिस्तर से उतरकर उन्होंने दरवाजा खोला तो देखा, दरवाजे पर चार अजनबी युवक खड़े हैं । देखने से बदहवास से...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा एक दिन मिथिला बाजार में चहल-कदमी कर रहे थे। वहाँ एक सेठ एक भारी बक्सा लिए बैठा था और बार-बार मजदूरों को बुलाता और उनसे कुछ बातें करता और मजदूर गर्दन हिलाते हुए या हाथ को इनकार की मुद्रा में हिलाते हुए वहाँ से चले जाते । काफी देर तक बाजार चौक...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा खेती-बाड़ी सँ कम्मे मतलब राखथि । राज दरबारक काज सँ फुर्सति नहि रहनि तथापि बाप-पुरखाक छोड़ल जमीन पर येनकेन प्रकारेण खेती करथि । एहि बेर किछु समय सँ हुनका खुट्टा पर बड़द नहि रहनि । खेती कोनो खास नहि रहनि आ तें गोनू बड़द कीनब आवश्यक नहि बुझथि ।...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा के गाँव में एक बार चोरों का एक गिरोह सक्रिय हो गया । गोनू झा के घर से भी कुछ सामानों की चोरी हो गई । गोनू झा ने उस दिन ही संकल्प ले लिया कि जब तक वे चोरों को सबक न सिखा दें तब तक चैन की साँस नहीं लेंगे। माघ का महीना ! कड़ाके की ठंड ! शाम...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा काली मायक बड्ड पैघ भक्त छलाह । ओना तँ संपूर्ण मिथिलांचल मे शक्तिपूजाक प्रधानता छैक, तथापि गोनू नित्य माताक पूजा करैत छलाह आ माताक प्रसादात् ओ स्वस्थ आ प्रसन्नचित्त रहैत छलाह । हुनक बुद्धिमत्ताक लोहा नहि केवल गामे भरि मे वरन् मिथिला...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
मिथिला नरेश की जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही थी, वैसे-वैसे वे मनमौजी होते जा रहे थे। कई बार तो दरबारी उनके व्यवहार से चकित हो जाते और आपस में बतियाते कि महाराज तो इन दिनों सनकी होते जा रहे हैं । जब देखो तब बेतुकी बातें करने लगते हैं । एक दिन ऐसे ही मिथिला...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
जब कोई साधारण व्यक्ति असाधारण सफलता अर्जित कर लेता है तब एक ओर तो उसके प्रशंसकों की बाढ़-सी आ जाती है तो दूसरी तरफ उससे ईष्या करने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है । गोनू झा जब मिथिला नरेश के दरबार के विदूषक नियुक्त हुए तब आम दरबारियों को यह अनुमान भी...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा गद्गद मन से मिथिला नरेश के दरबार से अपने घर की ओर जा रहे थे। महाराज ने उन्हें एक भैंस भेंट की थी । भैंस बड़ी मस्त, मोटी ताजी थी । दूध भी खूब देती थी । गोनू झा अपने हाथ में भैंस के गले की रस्सी थामे मस्त चाल में चले जा रहे थे। रास्ते में...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
मिथिला नरेश के दरबार में जब कभी कोई काम नहीं रहता या महाराज मनोरंजन की इच्छा प्रकट करते तो सारी औपचारिकताएँ समाप्त हो जातीं और दरबारियों को मनचाहा कहने -सुनने की छूट मिल जाती । मिथिला नरेश के दरबार में एक दरबारी थे पलटू झा । गोनू झा से पुराने और...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
शातिर चोरों को हवालात की सैर करवाने के कारण गोनू झा पूरे मिथिलांचल के चोरों की आँखों की किरकिरी बन गए। मिथिला में ठग और चोर गोनू झा से बदला लेने की ताक में रहने लगे। ठगों और चोरों की नाक में नकेल डालने के कारण मिथिला नरेश की दृष्टि में गोनू झा का...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
गोनू झा मिथिला-दरबार के विदूषक बनाए जाने से पहले विपन्न थे। उन्हें कोई पूछता नहीं था । जब वे मिथिला नरेश के प्रतिष्ठित दरबारी बन गए तो गाँव में 'गोर लागै छी' ( पाँव छूता हूँ ) कहने वालों की कमी न रही । विवाह के बाद तो नाते -रिश्तों की भी बाढ़ आ गई ।...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
मिथिला में चोर -उचक्कों और ठगों का कभी बहुत जोर था । चोर-उचक्कों के इस जोर के कारण ही कोई अजनबी न तो मिथिला जाना चाहता था और न वहाँ के लोगों से मेल -जोल बढ़ाने का ही साहस कर पाता था । मिथिलांचल नरेश ने चोरी और ठगी रोकने के कई उपाय किए लेकिन सारे...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
"अरे वाह, पंडित जी ! बहुत शानदार बैल लिए जा रहे हैं ! कितने में मिला ?" गोनू झा अभी पशु मेले से निकले ही थे कि एक व्यक्ति ने उनसे पूछा । गोनू झा ने उस व्यक्ति की ओर देखा किन्तु उसे पहचान नहीं पाए। फिर भी अपने चेहरे पर औपचारिक मुस्कान लाकर बोले -"...
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रचयिता: गोनू झा • लोकगाथा
सभी जानते हैं कि गोनू झा माँ काली के परम भक्त थे। गोनू झा की श्रद्धाभक्ति से माँ काली प्रसन्न हो गईं। उन्होंने गोनू झा को दर्शन देने का मन बना लिया । उन्होंने सोचा कि गोनू झा बहुत चालाक है । इसलिए दर्शन देने से पहले उसे छकाया जाए । गोनू झा सोये हुए...
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