चन्दा मामा आउ न
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1960)
चन्दा मामा आउ न, दूध-बतासा खाउ न! सोनेक थारीमे खीर परसब, आँगन बैसे बैसाउ न...
विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।
कालजयी उपन्यास, व्यंग्य ग्रन्थावली आ लोककथा श्रृंखला सभ अध्यायवार उपलब्ध अछि:
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1960)
चन्दा मामा आउ न, दूध-बतासा खाउ न! सोनेक थारीमे खीर परसब, आँगन बैसे बैसाउ न...
✍ मैथिली शोध प्रकोष्ठ (2024)
मधुश्रावणी, छठि, जुड़ाशीतल, भरदूतिया आ सामा-चकेवा: प्रकृतिक संग सामंजस्यक पावन परंपरा...
✍ मैथिली शोध प्रकोष्ठ (2023)
२२ दिसंबर २००३ केँ भारतीय संविधानक अष्टम अनुसूचीमे मैथिलीक ऐतिहासिक समावेश आ वैश्विक संभावनाएं...
✍ मैथिली शोध प्रकोष्ठ (2024)
१०वीं शताब्दी सँ वर्तमान धरि तिरहुता लिपिक पुरातात्विक प्रमाण, ताड़पत्र पाण्डुलिपि आ डिजिटल पुनरुद्धार...
मिथिलाक वन प्रान्तक नीतिपरक बाल-लोककथा, जाहिमे दुर्बल प्राणी बुद्धि बलेँ बलवान पर विजय प्राप्त करैत अछि...
भाई-बहिनक अगाध स्नेहक पावन पर्व सामा-चकेवाक पौराणिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि...
✍ गोनू झा (1420)
गोनू झाक बुद्धिमत्ता सँ चोर सभ किना स्वयं अपन जालमे फँसलाह, मिथिलाक प्रसिद्ध मनोरंजक लोककथा...
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1890)
एक बेर मिथिलाक एक सुरम्य गाममे चारि मित्र रहैत छलाह। तीन गोटे शास्त्रमे परम पारंगत छलथि, मुदा व्यवहारिक बुद्धिक अभाव छलन्हि। विद्या आर...
✍ राजकमल चौधरी (1964)
नगरक कोलाहलमे गामक स्मृतिक सुगंध आ जीवनक कठिन सत्यक साक्षात्कार...
✍ लिली रे (1978)
मिथिलाक सामाजिक परिवेशमे स्त्रीक अस्मिता, संघर्ष आ आत्मनिर्णयक प्रेरक आख्यान...
✍ राजकमल चौधरी (1965)
बाजार सँ अनल गेल मछरी आ गामक पारिवारिक संवेदना केर आधुनिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण...
✍ हरिमोहन झा (1933)
मिथिलाक ग्रामीण जीवनमे अंग्रेजी पढ़ल नवयुवकक विवाह आर परंपराक बीच द्वंद्वक सजीव चित्रण...