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मैथिली लोक समग्र ज्ञान खोज
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साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
सरस्वती दाइ अत्यन्त संस्कारिणी ओ चमत्कारिणी छलीह । दुर्गा ओ गीता पाठ करयवाली । बजबाक चमत्कार तेहन जे अरिकोंच कैं 'अरिकंचन' कहैत छलीह, बॅंसबाड़ि 'वंशवाइरि' । परन्तु भगवानो त विचित्र कौतुकी छथि । हुनक विवाह भेलैन्ह भदेशक मौजे लाल झा सॅं जे निट्ठाह...
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#हास्य-व्यंग्य
#कथा
#हरिमोहन झा
#प्रणम्य देवता
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
कविजी मे तीन टा विलक्षण गुण छलैन्ह। ओ अत्यन्त भावुक छलाह। एतेक भावुक, जे कल्पित नायिकाक व्यथा सॅं आँखि मे नोर भरि अबैत छलैन्ह। दोसर, जे ओ नख सॅं शिख पर्यन्त सौन्दर्यक उपासक छलाह। एहन रसिक, जे अपन उपनाम 'अंचल' रखने छलाह। तेसर, जे ओ प्रगतिशील छलाह।...
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#हास्य-व्यंग्य
#कथा
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#प्रणम्य देवता
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
एम्हर एकदिन खट्टर कका सॅं भेट भेल छल । पुछलिऎन्ह- खट्टर कका प्रशन्न छी ? बजलाह- प्रशन्न की रहब ? सन्न छी । अपना देशक हालति देखिकऽ । सुजला, सुफला, शस्यश्यामला भूमि में हमरा लोकनि अजला अफला, सुन्यश्यामला बना देलिऎन्ह और भिक्षापात्र नेने संसार क आगाँ...
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#हास्य-व्यंग्य
#कथा
#हरिमोहन झा
#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
मिस बिजली कैं छकैबाक हेतु सी० सी० मिश्रक पेट मे हर बहय लगलैन्ह । कखनो होइन्ह जे व्यायामशाला मे जा कऽ बौक्सिंग प्रैक्टिस करी । कखनो होइन्ह जे एक बढ़ियाँ घोड़ा लऽ कऽ मैदान मे सवारीक अभ्यास करी । कखनो होइन्ह जे गंगाक ओहि पार जा बन्दूक चलैबाह रेयाज करी ।...
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#हरिमोहन झा
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#द्विरागमन
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहिदिन खट्टर कका खाट घोरैत रहथि । हमरा संग में एक व्यक्ति कैं देखि कऽ बजलाह – हौ, ई झुल्फी बला के छथिन्ह ? हम कहलिऎन्ह – ई कवि छथि । हमर सार थिकाह । अपन कविता अहाँ कैं सुनाबय चाहैत छथि । खट्टर कका बजलाह - आइ हमरा बैसि कऽ कविता सुनबाक फुरसति नहिअछि।...
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#कथा
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#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन फगुआ रहैक । खट्टर कका केसर बादाम दऽ कऽ भाङ्ग छनैत रहथि । हमरा देखितहि बजलाह - आबह-आबह । आइ केसरिया छनैत छैक। एक गिलास तोहूँ पीबि लैह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, हम त नहिं पिबैत छी । ख० - तखन किऎक जिबैत छी ? नोनकाढा पीबक हेतु ? हौ, ई मानव जन्म...
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#हरिमोहन झा
#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहिदिन खट्टर कका मखानक लावा फॅंकैत रहथि। हमरा हाथ में लेख देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह- मिथिला क संस्कृति पर एकटा निबंध तैयार कैल अछि। खट्टर कका बजलाह- किछु हमरो सुनाबह। हम कहलिऎन्ह - पहिने राजर्षि जनक सॅं प्रारंभ कैने छिऎन्हि। ओ तेहन...
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#कथा
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#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
गाड़ी छुटि गेला उत्तर बुचकुन चौधरी जाड़ तथा क्रोध क वेग सॅं थरथर काँपय लगलाह । गंगाजी क प्रति जे भक्ति छलैन्ह से विरक्ति क रूप मे परिणत भय गेलैन्ह । डाड़ मे अङ्गपोछा लपेटि भीजल धोती गाड़ैत-गाड़ैत बाजय लगलाह - आब कलियुग क गंगा मे कोनो टा महत्व नहि रहल ।...
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#हरिमोहन झा
#उपन्यास
#कन्यादान
साहित्य (Literature)
POEM
✓ मूल मैथिली
रचयिता: महाकवि विद्यापति • कविता
बड़ सुख सार पाओल तुअ तीरे। छोड़इत निकट नयन बह नीरे॥ करजोड़ि विनमओ विमल तरंगे...
साहित्य (Literature)
POEM
✓ मूल मैथिली
रचयिता: महाकवि विद्यापति • कविता
जय जय भैरवि असुर भयावनि, पशुपति भामिनि माया। सहज सुमति वर दियहु गोसाउनि, अनुगत गति तुअ पाया॥