पोखरि
(en) Pond, water reservoir, lake • (hi) तालाब, सरोवर, पोखर
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(en) Pond, water reservoir, lake • (hi) तालाब, सरोवर, पोखर
ओहि दिन भोज खा कऽ लोक फिरल चल अबैत रहय कि मकुनाही पोखरि लग वर्षा झहरय लगलैक। लोक पड़ा कऽ ब्रह्मथान तर आबि बैसल। मड़ैयामे बड़का सौंफ पसरल रहैक से लोक सॅं भरि गेल। लंबोदर चौधरि बजलाह-इह! गर्मी सॅं मिजाज अक्कसक्क छल। आब जा कऽ ठंढा भेल। दीर्घनारायण...
महामहोपाध्याय पं. धुरन्धर शास्त्री धर्मशास्त्रक कट्टर अनुयायी छलाह। ओ सभ कार्य स्मृतिक अनुसारे करैत छलाह। षट्कर्मी तेहन, जे जारनो कैं बिनु धोएने भानस मे नहि जाय दैत छलाह। नित्य अरबे-अरबान भोजन। अछिंजलक व्यवहार। कहियो फलाहार, कहियो पंचगव्य। ककरो सॅं...
बर्तुहारीक प्रसंग मे बहुतो तरहक अनुभव लोक कैं प्राप्त भऽ जाइत छैक । एक ठाम हमरो तेहन भयंकर सत्कार भेल जे स्मरण कय औखन देह सिहरि उठैत अछि। घटकराज सोनमनि चौधरी कहलन्हि- अमुक गाम मे एकटा बड़ सुन्दर कथा हमरा नजरि मे अबैत अछि। ओ उच्च वंशक छथि, प्रायशः...
जखन पं० जी कैं निमंत्रण-पत्र भेटलैन्ह त आङन मे पंडिताइन कैं कहलथिन्ह - एहि कागतक अर्थ छैक केहुनिया खाजा, डेढ़सेरा मुङवा.......... पंडिताइन मुँह ताकय लगलथिन्ह । पंडित जी बजलाह - मधुवन डेउढ़ी मे उअपनयन छैक । कुमरम सॅं रातिम पर्यन्त पंडित लोकनिक डेरा...
गाम मे दू टा ज्योतिषी रहथि। एक फोंचाइ झा, दोसर खट्टर झा। दुहू ज्योतिषी अगाध विद्वान। परन्तु दुहू मे अश्वमाहिष्य योग लागल रहैन्ह। एक ईर घाट, त दोसर वीर घाट। एक जे बाजथि तकरा दोसर बिनु कटने नहि रहथि। विशेषतः जितिया और छठि मे दुहू दिग्गजक भिड़ान देखबा...
प्रथम दृश्य (मातृ वन्दना-पाँँच बालक द्वारा सम्मिलित गान) (आसावरी) द्वितीय दृश्य (पंडित अयाची मिश्र पूजापर बैसल छथि। आगाँँमे धूप, दीप, नैवेद्य, फूल, सराइ, पंचपात्र, अर्घी, घंटी आदि।) (बालक शंकरक प्रवेश) शंकर-बाबूजी, नवद्वीपसॅं एकटा विद्यार्थी आएल...
रमेश बाबू, ओ कन्या साक्षात् लक्ष्मी थीक। देखबामे दुर्गाक मुर्त्ति, शील-स्वभावमे गंगा। भोजन कराबयमे अन्नपूर्णा। कहाँ धरि वर्णन करू? भोरे उठि फूल तोड़ैत अछि। गोसाउनि सीर निपैत अछि। अर्घी-सराइ मजैत अछि। स्नान कय भगवतीक पूजा करैत अछि। ई सभ कार्य...
आहि दिन पं० जीक चौपाड़िपर नोतिहारी सभ बैसल रहथि। बिझौ भऽ गेल रहैक, परन्तु भोजनमे किछु विलंब रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा। हुनका अबितहि सभ उल्लसित भऽ उठल जे आब गप्पक छुरुक्का उड़त। काशीनाथ कहलथिन्ह - आउ बाबा ! भल्लह बेर पर जुमलहुँ । एखन यैह...
एक दिन ब्रह्मा मनुष्यक मूर्त्ति गढैत रहथि। ताही बीचमे की फुरलैन्ह जे भाङ पीबि लेलन्हि। भाङ रहैक तेज। तुरन्त नशा चढि गेलैन्ह। जेना शिवजी तांडव नृत्य करै छथि, तहिना ओहो 'भांडव' नृत्य करय लगलाह। सम्पूर्ण ब्रह्मलोक डोलि उठल। सृष्टिशालाक भांड सभ ओङढाय...
मकुनाही पोखरिपर लूटन मिसर वैद्यकेँ मुँह धोइत देखि काशीनाथ कहलथिन्ह- वैद्यजी, एकटा नव गप्प सुनलिऎक अछि? वैद्यजी साकांक्ष होइत पुछलथिन्ह- की? कोन बात भेलैक अछि? काशीनाथ बजलाह- अपना इलाकामे एकटा ग्रामसेविका आएल अछि। वैद्यजी पुछलथिन्ह- 'ग्रामसेविका' कऽ...