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मैथिली लोक समग्र ज्ञान खोज
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साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन भोज खा कऽ लोक फिरल चल अबैत रहय कि मकुनाही पोखरि लग वर्षा झहरय लगलैक। लोक पड़ा कऽ ब्रह्मथान तर आबि बैसल। मड़ैयामे बड़का सौंफ पसरल रहैक से लोक सॅं भरि गेल। लंबोदर चौधरि बजलाह-इह! गर्मी सॅं मिजाज अक्कसक्क छल। आब जा कऽ ठंढा भेल। दीर्घनारायण...
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#चर्चरी
साहित्य (Literature)
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
महामहोपाध्याय पं. धुरन्धर शास्त्री धर्मशास्त्रक कट्टर अनुयायी छलाह। ओ सभ कार्य स्मृतिक अनुसारे करैत छलाह। षट्कर्मी तेहन, जे जारनो कैं बिनु धोएने भानस मे नहि जाय दैत छलाह। नित्य अरबे-अरबान भोजन। अछिंजलक व्यवहार। कहियो फलाहार, कहियो पंचगव्य। ककरो सॅं...
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साहित्य (Literature)
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
बर्तुहारीक प्रसंग मे बहुतो तरहक अनुभव लोक कैं प्राप्त भऽ जाइत छैक । एक ठाम हमरो तेहन भयंकर सत्कार भेल जे स्मरण कय औखन देह सिहरि उठैत अछि। घटकराज सोनमनि चौधरी कहलन्हि- अमुक गाम मे एकटा बड़ सुन्दर कथा हमरा नजरि मे अबैत अछि। ओ उच्च वंशक छथि, प्रायशः...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
जखन पं० जी कैं निमंत्रण-पत्र भेटलैन्ह त आङन मे पंडिताइन कैं कहलथिन्ह - एहि कागतक अर्थ छैक केहुनिया खाजा, डेढ़सेरा मुङवा.......... पंडिताइन मुँह ताकय लगलथिन्ह । पंडित जी बजलाह - मधुवन डेउढ़ी मे उअपनयन छैक । कुमरम सॅं रातिम पर्यन्त पंडित लोकनिक डेरा...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
गाम मे दू टा ज्योतिषी रहथि। एक फोंचाइ झा, दोसर खट्टर झा। दुहू ज्योतिषी अगाध विद्वान। परन्तु दुहू मे अश्वमाहिष्य योग लागल रहैन्ह। एक ईर घाट, त दोसर वीर घाट। एक जे बाजथि तकरा दोसर बिनु कटने नहि रहथि। विशेषतः जितिया और छठि मे दुहू दिग्गजक भिड़ान देखबा...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
प्रथम दृश्य (मातृ वन्दना-पाँँच बालक द्वारा सम्मिलित गान) (आसावरी) द्वितीय दृश्य (पंडित अयाची मिश्र पूजापर बैसल छथि। आगाँँमे धूप, दीप, नैवेद्य, फूल, सराइ, पंचपात्र, अर्घी, घंटी आदि।) (बालक शंकरक प्रवेश) शंकर-बाबूजी, नवद्वीपसॅं एकटा विद्यार्थी आएल...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
रमेश बाबू, ओ कन्या साक्षात् लक्ष्मी थीक। देखबामे दुर्गाक मुर्त्ति, शील-स्वभावमे गंगा। भोजन कराबयमे अन्नपूर्णा। कहाँ धरि वर्णन करू? भोरे उठि फूल तोड़ैत अछि। गोसाउनि सीर निपैत अछि। अर्घी-सराइ मजैत अछि। स्नान कय भगवतीक पूजा करैत अछि। ई सभ कार्य...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
आहि दिन पं० जीक चौपाड़िपर नोतिहारी सभ बैसल रहथि। बिझौ भऽ गेल रहैक, परन्तु भोजनमे किछु विलंब रहैक। ताही बीचमे पहुँचि गेलाह भोलबाबा। हुनका अबितहि सभ उल्लसित भऽ उठल जे आब गप्पक छुरुक्का उड़त। काशीनाथ कहलथिन्ह - आउ बाबा ! भल्लह बेर पर जुमलहुँ । एखन यैह...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
एक दिन ब्रह्मा मनुष्यक मूर्त्ति गढैत रहथि। ताही बीचमे की फुरलैन्ह जे भाङ पीबि लेलन्हि। भाङ रहैक तेज। तुरन्त नशा चढि गेलैन्ह। जेना शिवजी तांडव नृत्य करै छथि, तहिना ओहो 'भांडव' नृत्य करय लगलाह। सम्पूर्ण ब्रह्मलोक डोलि उठल। सृष्टिशालाक भांड सभ ओङढाय...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
मकुनाही पोखरिपर लूटन मिसर वैद्यकेँ मुँह धोइत देखि काशीनाथ कहलथिन्ह- वैद्यजी, एकटा नव गप्प सुनलिऎक अछि? वैद्यजी साकांक्ष होइत पुछलथिन्ह- की? कोन बात भेलैक अछि? काशीनाथ बजलाह- अपना इलाकामे एकटा ग्रामसेविका आएल अछि। वैद्यजी पुछलथिन्ह- 'ग्रामसेविका' कऽ...
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ओहि दिन भयंकर झपसी लधने रहय। यारकका घूरपर बैसल लोक आगि तपैत रहय। बीच-बीचमे तेहन पुरबैयाक झटक उठैक जे लोक सिहरि उठय। काशीनाथ बजलाह-एहने जाड़मे ब्राह्मण बाछा बेचि कऽ कंबल किनलन्हि। भोलबाब कहलथिन्ह-हौ, तोरा लोकनि जाड़ देखलह कहिया? जाड़ आएल रहय उनासी...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि देन सायंकाल चाय पिबैत रही कि ताहि बीचमे नौकर एक टा 'विजिटिंग कार्ड' दऽ गेल। ओहिपर अंग्रेजी अक्षरमे लिखल छलैक- 'जा जारगंडी, प्रोड्युसर, मिथिलेटेड फिल्म कंपनी, बंबई।' नाम देखि हम अनुमान कैल जे कोनो अन्यदेशीय सज्जन हैताह। परन्तु जखन बजा पठौलिऎन्ह त...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
एक बेर कलकत्तामे जे दृश्य देखल से औखन आँखिमे नाचि रहल अछि। बोटेनिकल गार्डनमे गेल रही। विशाल वटवृक्षकेँ देखि मनमे एक भावना उठल। एके मूलसॅं कतेक शाखा-प्रशाखा फुटकल छैक! तहिना ई मानव समाज अछि। परन्तु यदि एहि सामान्य बातकेँ लोक स्मरण राखि सकैत! हम ई...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
-"हे औ पाहुन! देखू, फेर हमरा दस पड़ल। आब अहाँक गोटी कटा गेल।" -"ए तित्तिर दाइ! कन्ना नहि करू। अहाँकें दू खुदरा पड़ल अछि।" -"नहि! दस पड़ल अछि। एकटा कौड़ी चित्त छैक से नहि सुझै अछि?" -"नहि! दू टा कौड़ी चित्त छल। अहाँ कंगनासॅं घुसका देलिऎक ताहिसॅं एकटा पट...
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#बीछल कथा
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
एम्हर एकदिन खट्टर कका सॅं भेट भेल छल । पुछलिऎन्ह- खट्टर कका प्रशन्न छी ? बजलाह- प्रशन्न की रहब ? सन्न छी । अपना देशक हालति देखिकऽ । सुजला, सुफला, शस्यश्यामला भूमि में हमरा लोकनि अजला अफला, सुन्यश्यामला बना देलिऎन्ह और भिक्षापात्र नेने संसार क आगाँ...
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#खट्टर काका
#खट्टर ककाक तरंग