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मैथिली लोक समग्र ज्ञान खोज
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साहित्य (Literature)
STORY
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन सन्ध्याकाल पोखरिक घाटपर लालधोतीक जमघट लागल रहय। गामक नवयुवकवृन्द, जनिक विवाह एहि शुद्धमे भेल छैन्ह, सासुरसॅं विदा भऽ कऽ आएल छथि। रसिक मित्रक गोष्ठी, नव उमंग, एकान्त स्थान, सन्ध्याक समय-एहन ठाम रसक गप्प नहि हो त हो कतय? ओहि मंडलीमे सभ केओ...
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#हास्य-व्यंग्य
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#बीछल कथा
साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
भादवक पूर्णिमा कैं चन्द्रग्रहण थिकैक । लालकाकी एहि बेरि सदलबल काशी जैबाक न्यार कैने छथि । दल मे रहथिन्ह ढुनमुन काकी, बुच्चीदाइ, आवेशरानी, भखराइनवाली तथा ज्योतिषिआइन । बल मे रहथिन्ह - भोलानाथ झा, बटुकजी तथा पं० नमोनाथ झा । दशमीक रात्रिशेष मे भुरुकवा...
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साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
तार पहुँचैत देरी खढ़भढ़ मचि गेल लालकाकी बजलीह कहू त भला एना कतहु द्विरागमन भेलैक अछि ! भोलानाथ अनुमोदन करैत कहलथिन्ह - त ! द्विरागमन मे कतेक ओरिआओन करय पडै़ छैक । कन्याक हेतु कपड़ा-लत्ता, गहना-गुरिया....... ला० - बाजू-बिजौठ, बड़हरी, नकमुन्नी,...
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साहित्य (Literature)
NOVEL
✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
झारखंडीनाथ तार क अर्थ घोंखैत-घोंखैत गाम दिशि विदा भेलाह । एही धुन मे मस्त भेल बढल चल अबैत छलाह कि पाछां कनपट्टी लग घंटी टनटना उठलैन्ह । जहिना पाछाँ फिरि कऽ ताकय लगलाह कि नीचा साइकिल कऽ अगिला पहिया सरसराइत साँची धोती क मध्यभाग मे सन्हिया गेलैन्ह ।...
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साहित्य (Literature)
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका रामनवमी क हेतु फलाहार क ओरिआओन करैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - आइ पुरना पोखरि पर रामलीला छैक। चलब कि ने ? खट्टर कका बजलाह – तोरा लोकनि छौडा-मांगर छह। तमासा देखह गऽ। बूढ-सूढ कैं एहि सभ सॅं कोन प्रयोजन ? हम- से किएक, खट्टर कका ? एहि में त सभ कैं...
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#खट्टर ककाक तरंग
साहित्य (Literature)
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि दिन माछ पर शास्त्रार्थ बजरि गेल। बात भैलैक जे खट्टर कका पोखरि सॅं स्नान कैने चल अबैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - की खट्टर कका, माछ खाइ ? खट्टर कका बजलाह – अवश्य, अवश्य । कोन माछ छौह ? नेबो छौह कि बाडी सॅं नेने चलू ? हम कहलिऎन्ह - केवल सिद्धान्तक...
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
ओहि राति चन्द्र-ग्रहण लागल रहैक । सौंसे गामक लोक उमड़ि कऽ बड़का पोखरि में स्नान करैत छल । ओम्हर खट्टर कका अपना दलान में बैसल घूर तपैत रहथि । हम जा कऽ कहलिऎन्ह- खट्टर कका, ग्रहण स्नान नहिं करबैक । खट्टर कका बजलाह – हौ, ई पूस मास ! पाला पड़ैत ! ताहि में...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका कोल्हुआड़ में रस पेरबैत रहथि । हमरा देखि बजलाह - आबह, आबह । तोंहू एक गिलास पीबि लैह । शीतल भऽ जैबह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, शीतल त लोक अहाँक बाते सॅं भऽ जाइ अछि । अहाँ आनन्द-मूर्त्ति छि । खट्टर कका बजलाह – हौ, जीवन में और छैहे की ? आनन्द...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
खट्टर कका पुराण देखैत रहथि । हमरा देखि पुछलैन्ह – हौ, कोम्हर जाइ छह ? हम कहलिऎन्ह - ब्रह्मस्थान पर भागवत भऽ रहल छैक । हम कहलिऎन्ह - ब्रह्मस्थान पर भागवत भऽ रहल छैक । खट्टर कका बजलाह - तखन महा अनर्थ भऽ रहल छैक । हम - से किऎक, खट्टर कका । ख० – हौ,...
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
जखन सभागाछी पहुँचबा सॅं आध कोस बाँकी रहि गेलैन्ह तखन घुटर झा कैं बाह्यभूमि दिशि जैबाक शंका बूझि पड़लैन्ह । अपन नसिदानी क बटुआ भोलानाथ झा क हाथ मे दैत कहलथिन्ह 'हौ बाबू ! तोरा लोकनि आगाँ बड़ क गाछ तर बैसै जैहऽ । हम एहि पोखरि सॅं भेने अबैत छी ।'ई कहि...
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रचयिता: हरिमोहन झा • कथा
आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक सेवा-सत्कार मे कोनो भाङठ नहि होमक चाही। परन्तु समस्या ई जे पं० जी कैं कचहरीक काज सॅं ऎखन लहेरियासराय जैबाक छैन्ह। आब की हो? पंडिताइन...
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✓ मूल मैथिली
रचयिता: हरिमोहन झा • उपन्यास
-काग की दोस? -काग। -फक्का मुट्ठी बारह। आब लाबह बारहटा अंडी। -से त नहि होएतौह, हे सरौता! एतेक कन्ना नहि करह। एतबहि मे ढुनमुनकाकी ओहि ठाम पहुँचि गेलीह और बुच्ची दाई कैं फुलमतिया क संग काग-दोस खेलाइत देखि कहय लगलथिन्ह देखू त भला ई अकड़हड़! आइ हिनकर वर चल...
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रचयिता: राजकमल चौधरी • कथा
नगरक कोलाहलमे गामक स्मृतिक सुगंध आ जीवनक कठिन सत्यक साक्षात्कार...