दूध से भागने वाली बिल्ली
✍ गोनू झा
मिथिला में एक बार चूहों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगों का जीना हराम हो गया । चूहे खेत- खलिहान में उत्पात मचाते । धान की कोठियों में बिल...
विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।
कालजयी उपन्यास, व्यंग्य ग्रन्थावली आ लोककथा श्रृंखला सभ अध्यायवार उपलब्ध अछि:
✍ गोनू झा
मिथिला में एक बार चूहों की संख्या इतनी बढ़ गई कि लोगों का जीना हराम हो गया । चूहे खेत- खलिहान में उत्पात मचाते । धान की कोठियों में बिल...
✍ गोनू झा
मिथिला नरेश के दरबार में एक तहसलीदार नया-नया बहाल हुआ था । लोगों से जबरन मालगुजारी वसूलकर वह महाराज की नजरों में अपना महत्त्व बढ़ाना...
✍ गोनू झा
एक दिन मिथिला नरेश के दरबार में एक साधु आया । नरेश ने उनकी आवभगत की । श्रद्धा से कर जोड़े। आशीष ग्रहण किया । साधु ने बताया कि वह चारों...
✍ गोनू झा
भोनू झा गोनू झा के छोटे भाई थे । बड़े भाई के प्रति सम्मान भाव की कमी नहीं थी भोनू में, लेकिन उसे मलाल इस बात का था कि लोग जिस तरह गोनू...
✍ गोनू झा
गोनू झाक बुद्धिमत्ताक खिस्सा मिथिलाक घर-घर मे आइयो कहल-सुनल जा रहल अछि । गोनूक नोकर रहनि – वसुआ । वसुआ रहय सोझमतिया लोक आ ओकरा एहि बातक...
✍ गोनू झा
गोनू झा अपनी तीव्र बुद्धि के कारण न केवल मिथिला में प्रसिद्ध थे बल्कि उनकी प्रसिद्धि दूर-दराज तक पहुँच गई थी । उनके वाणी-चातुर्य की...
✍ गोनू झा
मिथिलांचल में खुशियों की सौगात लेकर आम मंजराए। गाँवों में बसन्त का आगमन उस साल कुछ ऐसा हुआ कि हर चेहरे पर रौनक बढ़ गई। आसार इस बात के थे...
✍ गोनू झा
मिथिला नरेश के दरबार में गोनू झा के बुद्धिकौशल और वाक्चातुर्य का जो जादू चल रहा था उसकी कीर्ति मिथिलांचल के आस -पास के क्षेत्रों में भी...
✍ गोनू झा
पूरे मिथिलांचल के नौजवानों में खलबली मची हुई थी । प्रायः हर बेरोजगार नौजवान उस प्रतियोगिता की तैयारी में जुटा हुआ था जो महाराज के दरबार...
✍ गोनू झा
गोनू झा अभी जगे ही थे कि चार नवयुवक उनके घर पहुँचे और गोनू झा के दरवाजे पर दस्तक दी । गोनू झा मन ही मन भुनभुनाये न जाने कौन आ गया , इतने...
✍ गोनू झा
मिथिला नरेश की सभा में उनके बचपन का मित्र परदेश आया था। नरेश उन्हें अपने अतिथि कक्ष में ले गए। उन्होंने अपने मित्र की खूब आवभगत की।...
✍ गोनू झा
गोनू झा एक दिन मिथिला बाजार में चहल-कदमी कर रहे थे। वहाँ एक सेठ एक भारी बक्सा लिए बैठा था और बार-बार मजदूरों को बुलाता और उनसे कुछ बातें...