गोनू की बहादुरी
✍ गोनू झा
गोनू झा की शादी हुई । मिथिलांचल में ब्राह्मणों के विवाह का आनन्द ही कुछ और है । ऐसे भी रामायण काल से ही मिथिला को प्रेम की नगरी की...
विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।
कालजयी उपन्यास, व्यंग्य ग्रन्थावली आ लोककथा श्रृंखला सभ अध्यायवार उपलब्ध अछि:
✍ गोनू झा
गोनू झा की शादी हुई । मिथिलांचल में ब्राह्मणों के विवाह का आनन्द ही कुछ और है । ऐसे भी रामायण काल से ही मिथिला को प्रेम की नगरी की...
✍ गोनू झा
मिथिला के लोग पाक-कला में निपुण होते हैं । तीज -त्योहारों पर तो प्रायः हर घर में तरह- तरह के पकवान बनते हैं । आम दिनों का भोजन भी...
✍ गोनू झा
बात उन दिनों की है जब गोनू झा मिथिला नरेश के दरबारी नहीं थे। उनके दिन अभाव में गुजर रहे थे। उनके साथ उनका छोटा भाई भी था । दोनों के लिए...
✍ हरिमोहन झा (1930)
घोर अन्धकार व्याप्त भय रहल अछि। आकाश मे समुद्र क लहरि जकाँ चारू कात सॅं कारी-कारी मेघ उमड़ रहल अछि। बीच-बीच मे बिजली चमकि उठैत अछि।...
✍ हरिमोहन झा (1930)
मण्डप पर बैसितहि मिस्टर सी० सी० मिश्रक नेत्र सभ सॅं पहिने ओहि सुपरिचित गुलाबी साड़ी क अन्वेषण मे इतस्ततः घूमय लागल। ई देखि पं० नमोनाथ झा...
✍ हरिमोहन झा (1930)
-काग की दोस? -काग। -फक्का मुट्ठी बारह। आब लाबह बारहटा अंडी। -से त नहि होएतौह, हे सरौता! एतेक कन्ना नहि करह। एतबहि मे ढुनमुनकाकी ओहि ठाम...
✍ हरिमोहन झा (1930)
गाड़ी छुटि गेला उत्तर बुचकुन चौधरी जाड़ तथा क्रोध क वेग सॅं थरथर काँपय लगलाह । गंगाजी क प्रति जे भक्ति छलैन्ह से विरक्ति क रूप मे परिणत भय...
✍ हरिमोहन झा (1930)
फैसला सुनबा क समय यावत मुद्दालह लोकनि कठघरा मे ठाढ़रहैत छथि, तावत पर्यन्त हुनका लोकनि क सौसे देह भुलकैत रहैत छैन्ह । किन्तु हाकिम क मुँह...
✍ हरिमोहन झा (1930)
संध्या क समय अछि । सूर्य भगवान रुसल जमाय जकाँ मुँह विधुऔने प्रस्थान कय रहल छथि । गङ्गाजी क हिलकोर देखि भान होइछ जेना जमाय क रुसला सॅं...
✍ गोनू झा
खेत भी तरह-तरह के होते हैं । सब कुछ मिट्टी पर निर्भर है कि किस खेत का क्या नाम होगा और किस तरह की मिट्टी वाले खेत को क्या कहेंगे। गोनू...
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1980)
मिथिलाक राजाक तीन गूढ़ प्रश्नक उत्तर एक सामान्य चरवाहा बालक किना देलक...
✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1975)
एकटा चूहा बड़ नटखट छल, रात-दिन घरक सब कपड़ा कुतरि दैत छल...