गोनू झा के ग्रह-दोष निवारण
✍ गोनू झा
गोनू झा राजदरबार मे नियुक्त भऽ गेल छलैथ, सबटा गाँव गोनू झा पर गर्व कऽ रहल छल। गोनू गामक नाम जे रोशन केने छलैथ। सब गोनू झा के शुभकामना...
विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।
कालजयी उपन्यास, व्यंग्य ग्रन्थावली आ लोककथा श्रृंखला सभ अध्यायवार उपलब्ध अछि:
✍ गोनू झा
गोनू झा राजदरबार मे नियुक्त भऽ गेल छलैथ, सबटा गाँव गोनू झा पर गर्व कऽ रहल छल। गोनू गामक नाम जे रोशन केने छलैथ। सब गोनू झा के शुभकामना...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका कैं ओहि दिन भाङ्ग घोटैत पुरातत्व्क सनक सवार भऽ गेलैन्ह। दूर-दूर क बात फूरय लगलैन्ह। हमरा देखितहि सोर कैलन्हि- हौ, कहाँ जाइ छह?...
बबुआनीजी मोसम्मातिक एक मात्र कन्या छलथिन्ह । तेहन दुलरुआ बेटी जे बारह वर्ष धरि खबासक कान्हे पर चलथिन्ह । दूध मे छाल्ही कम बूझि पड़ैन्ह त...
✍ गोनू झा
मिथिला नरेश कलाप्रिय व्यक्ति थे। अपने राज्य में कलाप्रेमियों को प्रोत्साहित करने के लिए वे प्रायः प्रतियोगिताओं का आयोजन कराते । विभिन्न...
✍ गोनू झा
एक बार मिथिला के राजदरबार में दिल्ली का एक पहलवान आया। वह सात फुट ऊँचा भारी डील-डौल वाला, मजबूत शरीर वाला पहलवान था जिसकी बांहों की...
✍ गोनू झा
गोनू झा का हास -परिहास और अपने कारनामों से लोगों को शिक्षा देने की प्रकृति केवल मिथिला नरेश के दरबार तक सीमित नहीं थी । वे अपनी...
✍ गोनू झा
जहिना गोनूक नाम तहिना हुनक आ हुनक भायक बीच भेल बँटवारा । गोनूक बढ़ैत प्रतिष्ठा सँ हुनक भाय बड़ जरथि आ सगरो दुष्प्रचार करथि जे भाय हमरा संग...
पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह मे गुदगुदी लागय...
आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक सेवा-सत्कार मे कोनो भाङठ...
✍ गोनू झा
गोनू झा खेती-पथारी सँ कम्मे मतलब राखथि । अधिकांश समय राज दरबार मे बीतैन । तथापि जे किछु पुरखा लोकनिक छोड़ल खेत रहनि ताहि पर खेती-बाड़ी...
✍ गोनू झा
मिथिला दरबार में गोनू झा की धूम मची रहती थी जिससे राम खेलावन मिश्र उर्फ मिसिर जी बहुत खीजे रहते थे। राम खेलावन यानी मिसिर जी की चलती तो...
✍ गोनू झा
ये कहानी गोनू झा के गांव की है। उनके गांव में भी बहुत बड़े वाले रहिते थे। कई लोग उनकी चालाकी से जलते थे, मगर मुंह पर उनके ‘पंखे’ बने...