खट्टर ककाक तरंग : 13. शास्त्रक वचन
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत...
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✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन खट्टर कका सॅं शास्त्रचर्चा छिडि गेल । बात ई भेलैक जे खट्टर कका चार छरबैत रहथि । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, भदबे में छवनी करबैत...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका पुराण देखैत रहथि । हमरा देखि पुछलैन्ह – हौ, कोम्हर जाइ छह ? हम कहलिऎन्ह - ब्रह्मस्थान पर भागवत भऽ रहल छैक । हम कहलिऎन्ह -...
✍ गोनू झा
“ईश्वर सर्वव्यापी है लेकिन वह मनुष्य के कर्म में हस्तक्षेप नहीं करता । उसे मनुष्य के भाव, मनुष्य की आस्था से ही सरोकार है...यह मन्नत और...
✍ गोनू झा
गोनू झा जब बच्चे थे तब उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था । उनके माता-पिता थे कि उनके पीछे हाथ -धोकर पड़े रहते थे कि वे पढ़ें । गोनू झा...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन ज्योतिषी मुसाइ झा हमरा ओहिठाम पतड़ा देखैत रहथि कि खट्टर कका भङघोंटना नेने पहुंचि गेलाह। हुनका देखितहि मुसाय झा अपन पोथी-पतड़ा...
✍ हरिमोहन झा (1943)
भोजक प्राते भेने द्विरागमनक विचार होमय लागल । भोलानाथ और कंटीर वस्तुजात कीनक हेतु दरिभंगा बिदा भेलाह । चिट्ठा देखि बुच्चिदाइ माय कैं...
✍ हरिमोहन झा (1930)
जखन सभागाछी पहुँचबा सॅं आध कोस बाँकी रहि गेलैन्ह तखन घुटर झा कैं बाह्यभूमि दिशि जैबाक शंका बूझि पड़लैन्ह । अपन नसिदानी क बटुआ भोलानाथ झा...
✍ गोनू झा
गोनू झा का पड़ोसी था राम खेलौना । ब्राह्मण कुल में जन्मा था किन्तु आचरण से शूद्र । उसके पिता ने उसे पढ़ाने -लिखाने की बड़ी कोशिश की...
✍ गोनू झा
एक शाम गोनू झा अपने तालाब के पास टहल रहे थे। मंद-मंद बयार बह रही थी । गाँव के घरों से धुआँ उठने लगा था । पनिहारिनें कुओं से पानी लेकर...
✍ गोनू झा
एक बेर ईरान सँ एकटा व्यापारी मिथिलाक दरबार मे आयल छल। ओ बहुत धनिक छल आ एखनो बहुत मुनाफा कमा क अपन देश वापस लौट रहल छल। रस्ता मे कतहु...
✍ गोनू झा
गोनू झा के साथ एक दिन मिथिला नरेश अपने बाग में टहल रहे थे। उन्होंने यूँ ही गोनू झा से पूछा कि देखना और दृष्टि-सम्पन्न होना एक ही बात है...
✍ गोनू झा
बसुआ यानी बासुदेव । गोनू झा के टहल -टिकोला में लगा रहने वाला उनके गाँव का एक किशोर। बसुआ, जिसका अपना सगा कोई नहीं था । गाँव में उसकी एक...