खट्टर ककाक तरंग : 15. भूतक मंत्र
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग धो कऽ पसबैत रहथि । हमरा संग एक अपरिचित व्यक्ति कैं देखि पुछलैन्ह – हौ, ई के छथुन्ह ? यदि ककरो हाथ में कुश देखी त कुशल...
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कालजयी उपन्यास, व्यंग्य ग्रन्थावली आ लोककथा श्रृंखला सभ अध्यायवार उपलब्ध अछि:
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग धो कऽ पसबैत रहथि । हमरा संग एक अपरिचित व्यक्ति कैं देखि पुछलैन्ह – हौ, ई के छथुन्ह ? यदि ककरो हाथ में कुश देखी त कुशल...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि । हमरा हाथ में गीताक पुस्तक देखि बजलाह - आब तों गीताक पाठ करैत छह ? हम कहलिऎन्ह – हॅं ! खट्टर कका बजलाह – हौ...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि कि हम जा कऽ कहलिऎन्ह - खट्टर कका, निमंत्रण दैत छी । खट्टर कका अत्यन्त प्रसन्न होइत बजलाह – अहा हा ! आबह,...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन फगुआ रहैक । खट्टर कका केसर बादाम दऽ कऽ भाङ्ग छनैत रहथि । हमरा देखितहि बजलाह - आबह-आबह । आइ केसरिया छनैत छैक। एक गिलास तोहूँ पीबि...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भाङ पिउने बुत्त रहथि। हमरा हाथ मे लोटा देखि पुछलन्हि- आइ भोरे-भोर कहाँ चललाह अछि ? हम - आइ शिवरात्रि थिकैक । महादेव पर जल ढारय...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन भुसकौलक बहिरु पंडित कैं खट्टर कका सॅं भिड़न्त भऽ गेलैन्ह । बात ई भेलैक जे पंडितजी छीतनबाबूक ओहि ठाम श्राद्धक नेओत पूरय आयल रहथि ।...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका कोल्हुआड़ में रस पेरबैत रहथि । हमरा देखि बजलाह - आबह, आबह । तोंहू एक गिलास पीबि लैह । शीतल भऽ जैबह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका,...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहिदिन खट्टर कका मखानक लावा फॅंकैत रहथि। हमरा हाथ में लेख देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह- मिथिला क संस्कृति पर एकटा निबंध तैयार...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका विजया क नशा में मस्त रहथि । आंँखि लाल रहैन्ह । हमरा दुर्गापाठ करैत बजलाह – तोरा लोकनि पाठ की करैत छह, ‘तुफान मेल' छोड़ै त छह ।...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका आङ्गन में भोजन करैत रहथि । हमरा देखि बजलाह - आबह आबह । तोंहू बैसह । हम कहलिऎन्ह - खट्टर कका, हम तुरंत भोजन कैने छी । एकटा...
✍ गोनू झा
गोनू झा अपन बुद्धिमत्ता आ वाकपटुताक लेल नहि केवल मिथिले वरन् अरोस-परोसक राज्य मे सेहो मशहूर रहथि । हुनक पहुँच राज दरवार धरि रहनि आ अपन...
✍ हरिमोहन झा (1948)
हम प्रातःकाल क श्लोक पढैत चल अबैत रही - आकि बाटे में भेटलाह खट्टर कका। बजलाह - की भोरे भोरे अगत्ती सभक नाम लैत छह। हम कहलिऎन्ह – खट्टर...