सार्वजनिक ज्ञान आ साहित्य निधि (Public Knowledge & Literature)

मैथिली डिजिटल पुस्तकालय

विद्यापति केर अमर पद सँ लऽ कऽ आधुनिक कथा, कविता, लोकगाथा आ बाल-साहित्य केर प्रामाणिक डिजिटल संग्रह।

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एहि विधाक सम्पूर्ण ग्रन्थ ओ संकलन:

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कथा संग्रह 📖 29 अध्याय / भाग

खट्टर ककाक तरंग

✍ हरिमोहन झा (1948)

मैथिली साहित्यक कालजयी व्यंग्य रचना। खट्टर ककाक पाण्डित्यपूर्ण, तार्किक आ हास्यरस सँ परिपूर्ण संवाद जाहिमे पुरातन रूढ़ि, पाखण्ड आ सामाजिक विडम्बना पर तीक्ष्ण कटाक्ष कएल गेल अछि।

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कथा संग्रह 📖 12 अध्याय / भाग

बीछल कथा

✍ हरिमोहन झा (1955)

पं. हरिमोहन झा केर कालजयी प्रतिनिधि कथा सभक प्रामाणिक संग्रह। 'कन्याक जीवन', 'रेलक अनुभव' आ 'शास्त्रार्थ' जेहन अमर मैथिली कथा सभ समाहित।

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कथा संग्रह 📖 22 अध्याय / भाग

चर्चरी

✍ हरिमोहन झा (1960)

मिथिलाक सामाजिक जीवन, दलानपरक गप्प-शप्प, ग्रामसेविका आ आधुनिक शिक्षाक विविध पक्ष सभ पर आधारित २२ मनोरंजक व्यंग्य कथाक संग्रह।

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कथा संग्रह 📖 11 अध्याय / भाग

प्रणम्य देवता

✍ हरिमोहन झा (1962)

मिथिलाक समाजमे विशेष स्थान रखनिहार सम्बंधी आ विशिष्ट पात्र सभ—'घरजमाय', 'धर्मशास्त्राचार्य', 'विकट पाहुन'—पर हरिमोहन झाक अनूठा हास्य-चित्र।

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रचना सूची (Individual Works & Chapters)

कुल 80 रचना
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📖 चर्चरी • अध्याय 1

चर्चरी : 1. ग्रेजुएट पुतोह

✍ हरिमोहन झा

पंडित काकाक आङन मे आइ बी० ए० पास कनियाँ आबि रहल छथिन्ह । ई सुनितहि सौंसे गाम मे कुतुहलक बाढ़ि आबि गेल । स्त्रीगणक देह मे गुदगुदी लागय...

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📖 चर्चरी • अध्याय 2

चर्चरी : 2. मर्यादाक भंग

✍ हरिमोहन झा

आइ पण्डितजीक आङनमे हूलिमालि उठल छैन्ह। कारण जे एक पाहुन आबि गेल छथिन्ह। सेहो विशिष्ट लोक। दुलारपुरक चौधरी। हुनक सेवा-सत्कार मे कोनो भाङठ...

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चारि मित्र आर बुद्धिक परीक्षा

✍ पारंपरिक लोकवार्ता (1890)

एक बेर मिथिलाक एक सुरम्य गाममे चारि मित्र रहैत छलाह। तीन गोटे शास्त्रमे परम पारंगत छलथि, मुदा व्यवहारिक बुद्धिक अभाव छलन्हि। विद्या आर...

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मछरी

✍ राजकमल चौधरी (1965)

बाजार सँ अनल गेल मछरी आ गामक पारिवारिक संवेदना केर आधुनिक मनोवैज्ञानिक विश्लेषण...

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खट्टर काकाक तरंग

✍ हरिमोहन झा (1948)

खट्टर काका अपन दालान पर गद्दा पर बैसकऽ पानक बीड़ा मुँहमे दैत कहलन्हि— 'हे बौआ! दुनियाक सब दर्शन एक दिस, आ मिथिलाक दही-चूड़ा एक दिस!'

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