खट्टर ककाक तरंग : 4. आयुर्वेद
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भाङ्ग धोइत रहथि। हमरा संग एक व्यक्ति कैं देखि पुछ्लथिन्ह - ई के थिकाह ? हम कहलिएन्ह - ई थिकाह वैद्यजी । खट्टर कका हुनका हाथ...
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एहि विधाक सम्पूर्ण ग्रन्थ ओ संकलन:
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भाङ्ग धोइत रहथि। हमरा संग एक व्यक्ति कैं देखि पुछ्लथिन्ह - ई के थिकाह ? हम कहलिएन्ह - ई थिकाह वैद्यजी । खट्टर कका हुनका हाथ...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका इनारक सब्जी पर बैसल कुरुड़ करैत रहथि । हम कहलिएन्ह - खट्टर कका ! अहाँक नाम तऽ दूर-दूर धरि प्रख्यात भऽ गेल । खट्टर कका बजलाह -...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका हमरा हाथ में मोटगर पुस्तक देखि पुछलन्हि - हौ, ई की थिकैक ? हम कहलिऎन्ह - आदर्श चरितावली । खट्टर कका उनटबैत-पुनटबैत बजलाह – ई...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भाङक नशा में बुत्त रहथि । हमरा हाथ में ग्रन्थ देखि पुछलन्हि- ई की थिकौह ? हम कहलिऎन्ह - दर्शन शास्त्र । खट्टर कका मुस्कुरा...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका रामनवमी क हेतु फलाहार क ओरिआओन करैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - आइ पुरना पोखरि पर रामलीला छैक। चलब कि ने ? खट्टर कका बजलाह – तोरा...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन माछ पर शास्त्रार्थ बजरि गेल। बात भैलैक जे खट्टर कका पोखरि सॅं स्नान कैने चल अबैत रहथि। हम पुछलिऎन्ह - की खट्टर कका, माछ खाइ ?...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि राति चन्द्र-ग्रहण लागल रहैक । सौंसे गामक लोक उमड़ि कऽ बड़का पोखरि में स्नान करैत छल । ओम्हर खट्टर कका अपना दलान में बैसल घूर तपैत रहथि...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहिदिन खट्टर कका खाट घोरैत रहथि । हमरा संग में एक व्यक्ति कैं देखि कऽ बजलाह – हौ, ई झुल्फी बला के छथिन्ह ? हम कहलिऎन्ह – ई कवि छथि । हमर...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग धो कऽ पसबैत रहथि । हमरा संग एक अपरिचित व्यक्ति कैं देखि पुछलैन्ह – हौ, ई के छथुन्ह ? यदि ककरो हाथ में कुश देखी त कुशल...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि । हमरा हाथ में गीताक पुस्तक देखि बजलाह - आब तों गीताक पाठ करैत छह ? हम कहलिऎन्ह – हॅं ! खट्टर कका बजलाह – हौ...
✍ हरिमोहन झा (1948)
खट्टर कका भांग घोंटैत रहथि कि हम जा कऽ कहलिऎन्ह - खट्टर कका, निमंत्रण दैत छी । खट्टर कका अत्यन्त प्रसन्न होइत बजलाह – अहा हा ! आबह,...
✍ हरिमोहन झा (1948)
ओहि दिन फगुआ रहैक । खट्टर कका केसर बादाम दऽ कऽ भाङ्ग छनैत रहथि । हमरा देखितहि बजलाह - आबह-आबह । आइ केसरिया छनैत छैक। एक गिलास तोहूँ पीबि...